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वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु • Niraj Kumar
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दृक् गणित वैदिक पंचांग • चित्रापक्ष लाहिड़ी अयनांश

आज का संपूर्ण वैदिक पंचांग एवं शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली • बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 • विक्रम संवत 2083 • शक संवत 1948

चयनित नगर के अक्षांश-देशांतर व समय-मान के अनुसार वास्तविक ग्रह स्पष्ट एवं लाहिड़ी अयनांश पर आधारित।

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आज के सक्रिय शुभ योग
सर्वार्थ सिद्धि योग
समय व विवरण देखें ↓

चौबीस-घंटे की वैदिक काल-रेखा (सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक)

वर्तमान समय: रोग चौघड़िया (अशुभ — मांगलिक कार्यों का त्याग करें) — 01:28 सायं तक • राहुकाल (01:28 सायं तक)
अभी
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर (चल)
लाभ
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर (चल)
रोग
काल
लाभ
राहुकाल
यमगण्ड
गुलिक काल
अभिजित मुहूर्त
☀️ सूर्योदय: 06:30 प्रातः🌇 सूर्यास्त: 05:39 सायं🌅 अगला सूर्योदय
सूर्योदय
06:30 प्रातः
सूर्यास्त
05:39 सायं
चन्द्रोदय
07:11 सायं
चन्द्रास्त
08:46 प्रातः
चन्द्र राशि
वृषभ
संपूर्ण दिन वृषभ राशि में (10:06 सायं, 29 अक्टू॰ (अगले दिन) पर मिथुन में प्रवेश)
सूर्य राशि
तुला
दिशा शूल: उत्तर

पंचांग के पांच मुख्य अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण)

1. तिथिकृष्ण पक्ष
तृतीया

समाप्ति समय: 01:07 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन)

इसके उपरांत: चतुर्थी

2. वार (दिन)स्वामी ग्रह: बुध देव
बुधवार

दिशा शूल: उत्तर

3. नक्षत्रचरण 3
कृत्तिका

स्वामी ग्रह: सूर्य • समाप्ति समय: 01:25 सायं

इसके उपरांत: रोहिणी

4. योग
व्यतीपात

समाप्ति समय: 07:18 प्रातः

इसके उपरांत: वरीयान

5. करणचर करण
वणिज

समाप्ति समय: 02:37 सायं • इसके उपरांत: विष्टि (भद्रा) (01:07 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन))

विष्टि (भद्रा): भद्रा (विष्टि) 02:37 सायं से 01:07 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन) तक

दैनिक शुभ योग

सूर्य एवं चंद्रमा के वास्तविक खगोलीय स्पष्ट तथा मुहूर्त चिंतामणि व आनंदादि सूत्रों के आधार पर सटीक दैनिक गणना।

1 योग आज सक्रिय
वैदिक शुभ योग

सर्वार्थ सिद्धि योग

आज सक्रिय
शुभ समयावधि:
सम्पूर्ण दिन (06:30 प्रातः से 06:30 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन))
शास्त्रीय योग विधान: मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार वार एवं विशिष्ट नक्षत्रों के शुभ संयोग द्वारा निर्मित।

समस्त मनोरथों को सिद्ध करने वाला महायोग। यह अनेक ज्योतिषीय दोषों का निवारण कर नवीन व्यापार, वाहन/भवन क्रय, अनुबंध एवं अभीष्ट कार्यों में निर्विघ्न सफलता दिलाता है।

वैदिक शुभ योग

रवि योग

आज अनुपस्थित
शुभ समयावधि:
आज यह योग नहीं बन रहा है
शास्त्रीय योग विधान: सूर्य के वर्तमान नक्षत्र से चंद्रमा के नक्षत्र की गणना करने पर 4, 6, 9, 10, 13 अथवा 20वाँ नक्षत्र होने पर।

भगवान सूर्य देव के दिव्य तेज से युक्त यह योग सहस्रों दुर्योगों व बाधाओं को भस्म करने में समर्थ माना गया है। यह विजय, स्वास्थ्य लाभ एवं महत्वपूर्ण कार्यों हेतु विशेष फलदायी है।

वैदिक शुभ योग

अमृत योग

आज अनुपस्थित
शुभ समयावधि:
आज यह योग नहीं बन रहा है
शास्त्रीय योग विधान: वार के आधार नक्षत्र से गणना करने पर 28 आनंदादि योगों का 21वाँ अमृत योग (रवि+उत्तराषाढ़ा, सोम+शतभिषा, मंगल+अश्विनी, बुध+मृगशिरा, गुरु+आश्लेषा, शुक्र+हस्त, शनि+अनुराधा)।

वैदिक मुहूर्त शास्त्र के 28 आनंदादि योगों में 21वाँ 'अमृत' योग। यह अमृत तुल्य जीवन-ऊर्जा, आरोग्य तथा दीर्घकालिक मांगलिक कार्यों को स्थायित्व प्रदान करता है।

वैदिक शुभ योग

अमृत सिद्धि योग

आज अनुपस्थित
शुभ समयावधि:
आज यह योग नहीं बन रहा है
शास्त्रीय योग विधान: वार एवं नक्षत्र का सिद्ध संयोग: रवि+हस्त, सोम+मृगशिरा, मंगल+अश्विनी, बुध+अनुराधा, गुरु+पुष्य, शुक्र+रेवती, शनि+रोहिणी।

मुहूर्त चिंतामणि का अत्यंत प्रभावशाली सिद्धि योग, जिसमें किए गए कार्य अमृत के समान अक्षय फल प्रदान करते हैं। व्यापारिक अनुबंध, स्वर्ण आभूषण क्रय, नए पदभार एवं धार्मिक अनुष्ठान हेतु उत्तम।

वैदिक शुभ योग

गुरु पुष्य योग

आज अनुपस्थित
शुभ समयावधि:
आज यह योग नहीं बन रहा है
शास्त्रीय योग विधान: गुरुवार (बृहस्पतिवार) के दिन चंद्रमा के पुष्य नक्षत्र में संचरण करने पर निर्मित।

समस्त मुहूर्तों का मुकुटमणि 'गुरुपुष्यामृत योग'। जब गुरुवार के दिन नक्षत्रराज पुष्य का शुभ संयोग होता है, तब यह महायोग बनता है। स्वर्ण, भूमि, वाहन, प्रतिष्ठान उद्घाटन एवं श्री महालक्ष्मी साधना हेतु सर्वश्रेष्ठ।

शुभ मुहूर्त एवं अमृत काल

अभिजित मुहूर्त11:42 प्रातः – 12:27 सायं
अमृत काल11:15 प्रातः – 12:42 सायं
ब्रह्म मुहूर्त04:47 प्रातः – 05:38 प्रातः
विजय मुहूर्त01:56 सायं – 02:40 सायं

अशुभ समय (राहुकाल, यमगण्ड, भद्रा आदि)

राहुकाल12:04 सायं – 01:28 सायं
यमगण्ड07:53 प्रातः – 09:17 प्रातः
गुलिक काल10:41 प्रातः – 12:04 सायं
दुर्मुहूर्त11:42 प्रातः – 12:27 सायं
वर्ज्य03:56 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन) – 05:23 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन)
विष्टि (भद्रा)भद्रा (विष्टि) 02:37 सायं से 01:07 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन) तक

दिन एवं रात्रि का चौघड़िया मुहूर्त

दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त)

लाभ(व्यापार, निवेश व शिक्षा हेतु उत्तम)
06:30 प्रातः – 07:53 प्रातः
अमृत(सर्वश्रेष्ठ शुभ चौघड़िया (सभी कार्यों हेतु))
07:53 प्रातः – 09:17 प्रातः
काल(अशुभ — नए कार्य प्रारंभ न करें)
09:17 प्रातः – 10:41 प्रातः
शुभ(धार्मिक व मांगलिक कार्यों हेतु शुभ)
10:41 प्रातः – 12:04 सायं
रोग(अशुभ — मांगलिक कार्यों का त्याग करें)
12:04 सायं – 01:28 सायं
उद्वेग(अशुभ (केवल राजकीय कार्यों हेतु))
01:28 सायं – 02:52 सायं
चर (चल)(यात्रा एवं गतिशील कार्यों हेतु अनुकूल)
02:52 सायं – 04:15 सायं
लाभ(व्यापार, निवेश व शिक्षा हेतु उत्तम)
04:15 सायं – 05:39 सायं

रात्रि का चौघड़िया (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय)

लाभ(व्यापार, निवेश व शिक्षा हेतु उत्तम)
05:39 सायं – 07:15 सायं
उद्वेग(अशुभ (केवल राजकीय कार्यों हेतु))
07:15 सायं – 08:52 सायं
शुभ(धार्मिक व मांगलिक कार्यों हेतु शुभ)
08:52 सायं – 10:28 सायं
अमृत(सर्वश्रेष्ठ शुभ चौघड़िया (सभी कार्यों हेतु))
10:28 सायं – 12:05 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन)
चर (चल)(यात्रा एवं गतिशील कार्यों हेतु अनुकूल)
12:05 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन) – 01:41 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन)
रोग(अशुभ — मांगलिक कार्यों का त्याग करें)
01:41 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन) – 03:17 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन)
काल(अशुभ — नए कार्य प्रारंभ न करें)
03:17 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन) – 04:54 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन)
लाभ(व्यापार, निवेश व शिक्षा हेतु उत्तम)
04:54 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन) – 06:30 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन)

चन्द्रबल तालिका (१२ राशियों के लिए आज का चन्द्र गोचर बल)

मेषमध्यम (सामान्य)

2वें भाव में चन्द्रमा — मध्यम फलदायी

वृषभशुभ (चन्द्रबल युक्त)

1वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल

मिथुनअशुभ (चन्द्रबल क्षीण)

12वें भाव में चन्द्रमा — शिव/चन्द्र मंत्र जपें

कर्कशुभ (चन्द्रबल युक्त)

11वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल

सिंहशुभ (चन्द्रबल युक्त)

10वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल

कन्यामध्यम (सामान्य)

9वें भाव में चन्द्रमा — मध्यम फलदायी

तुलाअशुभ (चन्द्राष्टम)

अष्टम चन्द्रमा (चन्द्राष्टम) — नए कार्यों में सावधानी रखें

वृश्चिकशुभ (चन्द्रबल युक्त)

7वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल

धनुशुभ (चन्द्रबल युक्त)

6वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल

मकरमध्यम (सामान्य)

5वें भाव में चन्द्रमा — मध्यम फलदायी

कुम्भअशुभ (चन्द्रबल क्षीण)

4वें भाव में चन्द्रमा — शिव/चन्द्र मंत्र जपें

मीनशुभ (चन्द्रबल युक्त)

3वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल

आज के पर्व, व्रत एवं विशेष योग

संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत

संकष्टी चतुर्थी व्रत

विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की कृपा प्राप्ति हेतु चतुर्थी व्रत; रात्रि में चन्द्रोदय अर्घ्य के पश्चात व्रत पारण।

गृह प्रवेश, विवाह, वाहन क्रय या व्यापार मुहूर्त के लिए व्यक्तिगत परामर्श चाहते हैं?

आपकी जन्म राशि, नक्षत्र और ताराबल के अनुसार शुद्ध मुहूर्त निर्धारण हेतु आचार्य नीरज कुमार जी से सीधा परामर्श लें।