आज का संपूर्ण वैदिक पंचांग एवं शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली • बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 • विक्रम संवत 2083 • शक संवत 1948
चयनित नगर के अक्षांश-देशांतर व समय-मान के अनुसार वास्तविक ग्रह स्पष्ट एवं लाहिड़ी अयनांश पर आधारित।
चौबीस-घंटे की वैदिक काल-रेखा (सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक)
वर्तमान समय: रोग चौघड़िया (अशुभ — मांगलिक कार्यों का त्याग करें) — 01:28 सायं तक • राहुकाल (01:28 सायं तक)पंचांग के पांच मुख्य अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण)
समाप्ति समय: 01:07 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन)
इसके उपरांत: चतुर्थी
दिशा शूल: उत्तर
स्वामी ग्रह: सूर्य • समाप्ति समय: 01:25 सायं
इसके उपरांत: रोहिणी
समाप्ति समय: 07:18 प्रातः
इसके उपरांत: वरीयान
समाप्ति समय: 02:37 सायं • इसके उपरांत: विष्टि (भद्रा) (01:07 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन))
विष्टि (भद्रा): भद्रा (विष्टि) 02:37 सायं से 01:07 प्रातः, 29 अक्टू॰ (अगले दिन) तक
दैनिक शुभ योग
सूर्य एवं चंद्रमा के वास्तविक खगोलीय स्पष्ट तथा मुहूर्त चिंतामणि व आनंदादि सूत्रों के आधार पर सटीक दैनिक गणना।
सर्वार्थ सिद्धि योग
समस्त मनोरथों को सिद्ध करने वाला महायोग। यह अनेक ज्योतिषीय दोषों का निवारण कर नवीन व्यापार, वाहन/भवन क्रय, अनुबंध एवं अभीष्ट कार्यों में निर्विघ्न सफलता दिलाता है।
रवि योग
भगवान सूर्य देव के दिव्य तेज से युक्त यह योग सहस्रों दुर्योगों व बाधाओं को भस्म करने में समर्थ माना गया है। यह विजय, स्वास्थ्य लाभ एवं महत्वपूर्ण कार्यों हेतु विशेष फलदायी है।
अमृत योग
वैदिक मुहूर्त शास्त्र के 28 आनंदादि योगों में 21वाँ 'अमृत' योग। यह अमृत तुल्य जीवन-ऊर्जा, आरोग्य तथा दीर्घकालिक मांगलिक कार्यों को स्थायित्व प्रदान करता है।
अमृत सिद्धि योग
मुहूर्त चिंतामणि का अत्यंत प्रभावशाली सिद्धि योग, जिसमें किए गए कार्य अमृत के समान अक्षय फल प्रदान करते हैं। व्यापारिक अनुबंध, स्वर्ण आभूषण क्रय, नए पदभार एवं धार्मिक अनुष्ठान हेतु उत्तम।
गुरु पुष्य योग
समस्त मुहूर्तों का मुकुटमणि 'गुरुपुष्यामृत योग'। जब गुरुवार के दिन नक्षत्रराज पुष्य का शुभ संयोग होता है, तब यह महायोग बनता है। स्वर्ण, भूमि, वाहन, प्रतिष्ठान उद्घाटन एवं श्री महालक्ष्मी साधना हेतु सर्वश्रेष्ठ।
शुभ मुहूर्त एवं अमृत काल
अशुभ समय (राहुकाल, यमगण्ड, भद्रा आदि)
दिन एवं रात्रि का चौघड़िया मुहूर्त
दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त)
रात्रि का चौघड़िया (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय)
चन्द्रबल तालिका (१२ राशियों के लिए आज का चन्द्र गोचर बल)
2वें भाव में चन्द्रमा — मध्यम फलदायी
1वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल
12वें भाव में चन्द्रमा — शिव/चन्द्र मंत्र जपें
11वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल
10वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल
9वें भाव में चन्द्रमा — मध्यम फलदायी
अष्टम चन्द्रमा (चन्द्राष्टम) — नए कार्यों में सावधानी रखें
7वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल
6वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल
5वें भाव में चन्द्रमा — मध्यम फलदायी
4वें भाव में चन्द्रमा — शिव/चन्द्र मंत्र जपें
3वें भाव में चन्द्रमा — श्रेष्ठ चन्द्रबल
आज के पर्व, व्रत एवं विशेष योग
संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत
संकष्टी चतुर्थी व्रतविघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की कृपा प्राप्ति हेतु चतुर्थी व्रत; रात्रि में चन्द्रोदय अर्घ्य के पश्चात व्रत पारण।
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