कुम्भ दैनिक राशिफल
वायु तत्वतत्व: वायु तत्व | राशि स्वामी: शनि | चन्द्र गोचर: चतुर्थ भाव (सुख एवं मातृ भाव)
चन्द्रमा वृषभ में (4वां भाव) • गुरु कर्क में (6वां भाव) • शनि मीन में (2वां भाव)
सुख भाव में चन्द्र संचरण आज घरेलू कार्यों में संयम रखने तथा जल्दबाजी के निर्णयों से बचने की प्रेरणा देता है। आज चन्द्रमा वृषभ राशि एवं रोहिणी नक्षत्र (चरण 4) में तथा कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि में संचरण कर रहे हैं। देवगुरु बृहस्पति आपके 6वें भाव (कर्क) में संचरण कर रहे हैं, अतः प्रत्येक संकल्प में धैर्य और प्रामाणिकता बनाए रखें।
करियर एवं व्यवसाय (कर्म भाव)
कार्यक्षेत्र में अनावश्यक विवादों से दूर रहकर अपने मूल दायित्वों पर ध्यान केंद्रित करें। 2वें भाव (मीन) में स्थित शनिदेव अनुशासन और समयबद्ध कार्यशैली की अपेक्षा रखते हैं। बुध के वक्री होने के कारण महत्वपूर्ण दस्तावेजों और पत्राचार को भेजने से पूर्व पुनः जांच लें।
चन्द्रमा 4वें भाव में होने से संयम अपेक्षित (-8) • शनि के 2वें भाव गोचर से अतिरिक्त परिश्रम आवश्यक (-3)
प्रेम एवं दांपत्य संबंध
जीवनसाथी की भावनाओं को समझें और छोटी-छोटी बातों पर संदेह या खिन्नता से बचें। शुक्र का आपके 9वें भाव (तुला) में गोचर संबंधों में माधुर्य और आपसी सामंजस्य को बढ़ा रहा है।
कारक ग्रह शुक्र का 9वें भाव में शुभ गोचर (+5) • गुरु (बृहस्पति) के 6वें भाव गोचर से अतिरिक्त परिश्रम आवश्यक (-3)
स्वास्थ्य एवं शारीरिक ऊर्जा
छाती में जकड़न या मानसिक बेचैनी से बचने के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम और पर्याप्त विश्राम करें। सूर्य आपके 9वें भाव तथा मंगल 6वें भाव में स्थित हैं—नियमित दिनचर्या, प्राणायाम और संतुलित जल-ग्रहण से स्वास्थ्य अनुकूल बना रहेगा।
चन्द्रमा 4वें भाव में होने से संयम अपेक्षित (-8) • सूर्य के 9वें भाव गोचर से अतिरिक्त परिश्रम आवश्यक (-3)
आर्थिक स्थिति एवं धन-लाभ
घर या वाहन के रखरखाव पर आकस्मिक व्यय संभव है; आज जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाए रखें। राशि स्वामी शनि एवं आज के वारेश बृहस्पति देव के समन्वय से बजट का संतुलन बनाए रखना और जोखिम भरे सौदों से बचना हितकर रहेगा।
गुरु (बृहस्पति) के 6वें भाव गोचर से अतिरिक्त परिश्रम आवश्यक (-3) • कारक ग्रह शुक्र का 9वें भाव में शुभ गोचर (+5)
पारिवारिक जीवन एवं गृह-सुख
माताजी के स्वास्थ्य और सुख-सुविधा का विशेष ध्यान रखें; उनकी सेवा व आशीर्वाद से मानसिक बल मिलेगा। परिघ योग के प्रभाव में पारिवारिक संवाद में सौहार्द और बड़ों का स्नेह बना रहेगा।
चतुर्थ (सुख) व द्वितीय (कुटुंब) भाव तथा परिघ योग के आधार पर निर्धारित
नीलमणि नीला एवं जामुनी
5
12:04 सायं – 01:28 सायं (लाभ चौघड़िया)
भगवान शिव का कच्चे दूध व शुद्ध जल से अभिषेक करें तथा माता का आशीर्वाद लेकर दिन का शुभारंभ करें।
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः (१०८ बार जप)
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